- मानव और कंप्यूटर
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मानव और कंप्यूटर प्रश्न उठता है कि क्या कंप्यूटर मानव से अधिक बुद्धिमान है? इसका साफ उत्तर है, नहीं, क्योंकि कंप्यूटर में कोई बुद्धि नहीं होती और न ही वह स्वयं किसी तरह का निर्णय ले सकता है । यह क्षमता उसे मानव हो Computer programming
language द्वारा देता है। कंप्यूटर बिना गलती के लगातार अत्यंत तेजी से काम कर सकता है, और दी गई जानकारी को न केवल सुरक्षित रख सकता है बल्कि जब चाहे उसे उपलब्ध करा सकता है। मानव की स्मृति (याद) में चीजें हमेशा साफ व व्यवस्थित नहीं रहती क्योंकि मानव की स्मृति पर उम्र, वातावरण तथा दैनिक जीवन के अनुभवों का असर पड़ता है। इसी कारण मानव सर्वाधिक तेज कंप्यूटर (सुपर कंप्यूटर) से सौगुना अधिक ज्ञान कोशिकाएँ होने के बाद भी अपनी जानकारी का उपयोग उतनी क्षमता से नहीं कर पाता।
मानव के मस्तिष्क होता है जिसके द्वारा वह स्वतंत्र रूप से सोच सकता है, गणना कर सकता है, और आँख-कान जैसी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा जानकारी प्राप्त करके तर्क-संगत निर्णय भी ले सकता है । वह अपने विचारों को बोल कर या लिख कर प्रकट कर सकता है।
कंप्यूटर भी कुछ इसी प्रकार से कार्य करते हैं । उन्हें जानकारी कुंजीपटल या अन्य इनपुट युक्तियों से प्राप्त होती है । वह पहले से प्राप्त डिस्कों पर संचित जानकारियों का भी प्रयोग कर सकता है । किसी कार्य विशेष को करने के लिये क्रमबद्ध आदेश (प्रोग्राम) उसे कुंजीपटल पर टाइप करके भी दिया जा सकता है, और वह उसे रिकार्ड की हुई डिस्क में से भी ले सकता है । कंप्यूटर के अन्दर लगी सीपीयू उसके मस्तिष्क की तरह से कार्य करती है । वह सारी उपलब्ध जानकारी (डेटा और प्रोग्राम) के अनुसार संगणना कर देता है और परिणाम मॉनीटर के पटल पर दिखा देता है, या स्थाई रूप से संचित रखने के लिये प्रिन्टर द्वारा कागज पर छाप देता है।
मानव व कंप्यूटर: एक अवलोकन कार्य
कंप्यूटर की विशेषताएँ।
कंप्यूटर हमारे जीवन में हर क्षेत्र में फैलता जा रहा है क्योंकि इसको विशेषताओं के कारण सभी क्षेत्रों में इसका अधिकाधिक उपयोग होने लगा है। कंप्यूटर की विशेषताएँ निम्न हैं।
- उच्च त्वरा (High Speed)
- संचय क्षमता (Storage capacity)
- विश्वसनीयता (Reliability)
- स्वचालन (Automation)
- निर्णय लेने की क्षमता (Decision Power)
- जानकारी की शीघ्र पुनः प्राप्ति।
उच्च त्वरा (High Speed)- कंप्यूटर बहुत तेजी से गणनाएँ करता है। कंप्यूटर की अपेक्षा मानव को सीमित गति की तुलना एक उदाहरण से स्पष्ट कर सकते हैं । मान लीजिए कि 3 अंकों की दो संख्याओं को आपस में गुणा करना है। इस काम में किसी अभ्यस्त व्यक्ति को भी 50 से 60 सेकेंड तक का समय लग जाता है। 01 लाख तक की गिनती गिनने में पूरा एक दिन सकता है। किन्तु माइक्रो-कंप्यूटर, जो एक सेकंड में एक लाख अनुदेशों का पालन कर सकता है, इन कामों को पलक झपकते ही कर लेता है और यदि 630 मेगाफ्लाप को क्षमता वाले सुपर कंप्यूटर की बात करें तो इस काम में लगने वाले अल्प समय की कल्पना भी कठिन होगी क्योंकि वह 01 सेकेंड एक खरब गणनाएं कर लेने में सक्षम है।
संचय क्षमता (Storage Capacity)- कंप्यूटर की सहायता से बहुत अधिक जानकारी को बहुत कम जगह में रखा जा सकता है। उदाहरण के लिए छोटे ग्रामोफोन रिकार्ड से भी छोटे आकार की काम्पेक्ट डिस्क या लेजर डिस्क में टाइप किये हुए कई हजार पेजों के बराबर जानकारी स्टोर की जा सकती है । पूरा का पूरा एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका एक 45 आर. पी. एम. रिकॉर्ड के बराबर लेजर डिस्क में दो बार रिकॉर्ड किया जा सकता है । एक लेजर डिस्क में 4 करोड़ शब्दों का संचय हो सकता है। हाल ही में विकसित हुई बबल मेमोरी में 50 लाख बिट्स प्रति वर्ग सेमी. क्षेत्रफल की दर से जानकारी स्टोर की जा सकती है । यही नहीं एक 45000 ग्रंथों वाली पूरी लाइब्रेरी एक कंप्यूटर से जुड़ी हुई लेजर डिस्क में आ सकती है।
विश्वसनीयता (Reliability)- कंप्यूटर में लगे हुए सभी उपकरण ठोस अवस्था (Solid State) वाले होते हैं और उनकी क्षमता (quality) इतने ऊँचे स्तर की होती है कि उन पर पूरी तरह निर्भर किया जा सकता है। इलेक्ट्रॉनिक होने के कारण इनकी गणना में अशुद्धि रहने की संभावना भी नगण्य ही होती है । डिजिटल (Digital) कंप्यूटर के परिणाम शत-प्रतिशत सही (accurate) होते हैं यद्यपि एनालॉग (Analog) में शुद्धता 0.1 प्रतिशत कम हो सकती है। कंप्यूटर एक दिये हुए प्रोग्राम को एक ही तरीके से बिना किसी गलती के बार-बार प्रयोग कर सकता है और हजारों बार प्रयोग होने पर भी वही परिणाम देता है।
स्वचालन (Automation)- कंप्यूटर हमारे द्वारा दिये गये प्रोग्रामों के अनुसार कई चरणों की गणनाएँ स्वयं स्वचालित रूप से कर लेता है। कई आधुनिक यंत्रों में रोबोट यानि यंत्रचालित मानव की सहायता ली जाती है। रोबट के संचालन में डिजिटल और एनालॉग दोनों ही कंप्यूटरों का मिला-जुला उपयोग किया जाता है । कंप्यूटर चालित इस तरह के यंत्रों का उपयोग कर मानव अपना समय बचा लेता है।
निर्णय लेने की क्षमता (Decision Power)- कंप्यूटर में उनकी हाई लेवेल भाषाओं की मदद से कोई प्रोग्राम डालकर कोई भी गणना कार्य स्वचालित रूप से कराया जा सकता है । डाले गये प्रोग्राम द्वारा कंप्यूटर के अंदर, निर्णय ले कर किये जाने वाले कार्य भी संपन्न हो जाते हैं । इसे इस तरह भी कह सकते हैं कि कंप्यूटर में कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence) पैदा हो जाती है और वह बिना किसी थकावट या दबाव के तकों का प्रयोग कर सकता है।
संचय क्षमता (Storage Capacity)- कंप्यूटर की सहायता से बहुत अधिक जानकारी को बहुत कम जगह में रखा जा सकता है। उदाहरण के लिए छोटे ग्रामोफोन रिकार्ड से भी छोटे आकार की काम्पेक्ट डिस्क या लेजर डिस्क में टाइप किये हुए कई हजार पेजों के बराबर जानकारी स्टोर की जा सकती है । पूरा का पूरा एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका एक 45 आर. पी. एम. रिकॉर्ड के बराबर लेजर डिस्क में दो बार रिकॉर्ड किया जा सकता है । एक लेजर डिस्क में 4 करोड़ शब्दों का संचय हो सकता है। हाल ही में विकसित हुई बबल मेमोरी में 50 लाख बिट्स प्रति वर्ग सेमी. क्षेत्रफल की दर से जानकारी स्टोर की जा सकती है । यही नहीं एक 45000 ग्रंथों वाली पूरी लाइब्रेरी एक कंप्यूटर से जुड़ी हुई लेजर डिस्क में आ सकती है।
विश्वसनीयता (Reliability)- कंप्यूटर में लगे हुए सभी उपकरण ठोस अवस्था (Solid State) वाले होते हैं और उनकी क्षमता (quality) इतने ऊँचे स्तर की होती है कि उन पर पूरी तरह निर्भर किया जा सकता है। इलेक्ट्रॉनिक होने के कारण इनकी गणना में अशुद्धि रहने की संभावना भी नगण्य ही होती है । डिजिटल (Digital) कंप्यूटर के परिणाम शत-प्रतिशत सही (accurate) होते हैं यद्यपि एनालॉग (Analog) में शुद्धता 0.1 प्रतिशत कम हो सकती है। कंप्यूटर एक दिये हुए प्रोग्राम को एक ही तरीके से बिना किसी गलती के बार-बार प्रयोग कर सकता है और हजारों बार प्रयोग होने पर भी वही परिणाम देता है।
स्वचालन (Automation)- कंप्यूटर हमारे द्वारा दिये गये प्रोग्रामों के अनुसार कई चरणों की गणनाएँ स्वयं स्वचालित रूप से कर लेता है। कई आधुनिक यंत्रों में रोबोट यानि यंत्रचालित मानव की सहायता ली जाती है। रोबट के संचालन में डिजिटल और एनालॉग दोनों ही कंप्यूटरों का मिला-जुला उपयोग किया जाता है । कंप्यूटर चालित इस तरह के यंत्रों का उपयोग कर मानव अपना समय बचा लेता है।
निर्णय लेने की क्षमता (Decision Power)- कंप्यूटर में उनकी हाई लेवेल भाषाओं की मदद से कोई प्रोग्राम डालकर कोई भी गणना कार्य स्वचालित रूप से कराया जा सकता है । डाले गये प्रोग्राम द्वारा कंप्यूटर के अंदर, निर्णय ले कर किये जाने वाले कार्य भी संपन्न हो जाते हैं । इसे इस तरह भी कह सकते हैं कि कंप्यूटर में कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence) पैदा हो जाती है और वह बिना किसी थकावट या दबाव के तकों का प्रयोग कर सकता है।
जानकारी की शीघ्र पुनः प्राप्ति (Quick Retrieval of
Information)- जानकारी का संचय करना आसान काम है जबकि किसी विशेष कार्य के लिए उसमें से संबंधित जानकारी को पुनः निकालना बहुत कठिन व समय खपाने वाला काम होता है लेकिन कंप्यूटर में यह काम बहुत तेजी से होता है। कंप्यूटर में सुरक्षित किसी भी जानकारी तक उसके इन्डेक्स नंबर की सहायता से एक पल में पहुँचा जा सकता है। इसकी मेमोरी से कोई डाटा या जानकारी निकालने में केवल कुछ नैनो सेकंड का समय ही लगता है। 01 नैनो सेकंड सेकंड का 1 अरबवां हिस्सा होता है।


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