कंप्यूटर का कार्य

कंप्यूटर का कार्य


कंप्यूटर एक मानव निर्मित मशीन है, जो अपने आप काम नहीं करता है। इससे काम लिया जाता है। यह हमारे आदेश का अक्षरशः पालन करता है । आदेश का जरिया ‘की-बोर्ड होता है । वैसे आजकल आवाज सुनकर अथवा स्क्रीन पर हाथ/ऊँगलियों को फेर कर भी इससे काम कराया जा सकता है । परन्तु प्रचलन में की-बोर्ड ही है । यह एक टाइपराइटर की तरह होता है । आप किसी भी प्रकार के आदेश को इसके माध्यम से कंप्यूटर को देते हैं। इसके बाद कंप्यूटर में एक हलचल होती है। आप क्या चाहते हैं इसकी जानकारी स्क्रीन पर उभर आती है । किसी भी प्रकार की कमी होने पर मॉनीटर में एरर मैसेज अंकित हो जाता है । मॉनीटर (टीवी स्क्रीन की तरह), सीपीयू (टावर अथवा फ्लैट आकार में) और की-बोर्ड मिलकर एक टर्मिनल बनता है । हालांकि साथ में एक माउस भी होता है और वह भी आपके आदेश को कंप्यूटर तक पहुँचाने का ही काम करता है। लेकिन उसकी क्षमता की-बोर्ड से कम होती है ।

एक कंप्यूटर को कार्य करने के लिये दो चीजों की आवश्यकता होती है  एक तो वह सूचना, अर्थात् डेटा जिस पर संगणना करनी है, और दूसरी वस्तु वे सूचीबद्ध आदेश हैं जिनके अनुरूप संगणना की जानी होती है। प्रोग्राम की आवश्यकता इसलिये पड़ती है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसर तो एक निर्जीव वस्तु है जिसकी अपनी कोई बुद्धि नहीं होती।

प्रोग्राम व डेटा, दोनों को ही कंप्यूटर के कुंजीपटल पर टाइप करके भरा जा सकता है, या फिर रिकार्ड किये हुए टेप या डिस्क में से लिया जा सकता है । इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसर दिये हुए प्रोग्राम के आदेशों को क्रम से पढ़ता जाता है और डेटा पर उन्हीं आदेशों के अनुसार संगणना करता चला जाता है । परिणामों को मॉनीटर के पटल पर प्रदर्शित कर दिया जाता है, या प्रिन्टर द्वारा कागज पर छाप दिया जाता है । हाँ, इस प्रक्रिया को करने के लिये एक अस्थाई स्मृति (रैम) परम आवश्यक है ।

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डिजाइन टूल्स तथा प्रोग्रामिंग भाषाएँ